Sabbath,

Tuesday, January 6, 2026

रविवार (Sunday) की शुरुआत कहाँ से हुई और किसने इसे बनाया?

 आज बहुत से लोग रविवार (Sunday) को प्रभु का दिन मानकर आराधना करते हैं। लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न है—

क्या रविवार की आराधना बाइबल से शुरू हुई, या बाद में मनुष्यों द्वारा स्थापित की गई?

इस लेख में हम इतिहास, बाइबल और रोमन साम्राज्य के संदर्भ से इसे समझेंगे।

1. बाइबल के अनुसार सच्चा विश्राम दिन कौन सा है?

बाइबल में परमेश्वर ने स्वयं विश्राम दिन निर्धारित किया:

“परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीष दी और उसे पवित्र ठहराया।”

(उत्पत्ति 2:2-3)

दस आज्ञाओं में भी लिखा है:

“सब्त दिन को स्मरण रखना कि उसे पवित्र मानो।”

(निर्गमन 20:8-11)

👉 यहाँ स्पष्ट है कि सातवाँ दिन (शनिवार / Sabbath) परमेश्वर द्वारा ठहराया गया दिन है, न कि रविवार।

2. यीशु और प्रेरित किस दिन आराधना करते थे?

यीशु मसीह स्वयं सब्त के दिन आराधनालय में जाते थे:

“वह अपनी रीति के अनुसार सब्त के दिन आराधनालय में गया।”

(लूका 4:16)

पौलुस और अन्य प्रेरित भी:

(प्रेरितों के काम 13:14, 17:2)

👉 बाइबल में कहीं भी यह नहीं लिखा कि यीशु या प्रेरितों ने सब्त बदलकर रविवार कर दिया।

3. फिर रविवार कैसे आया?

(क) रोमन संस्कृति का प्रभाव

रोम में सूर्य देव (Sun god / Mithra) की पूजा होती थी।

रविवार को वहाँ पहले से ही “Day of the Sun” कहा जाता था।

(ख) सम्राट कॉन्स्टेंटाइन का आदेश (321 ई.)

रोम के सम्राट कॉन्स्टेंटाइन ने 321 ईस्वी में एक कानून जारी किया:

“सूर्य के आदरणीय दिन (Sunday) को सभी नगरों में विश्राम का दिन माना जाए।”

⚠️ यह धार्मिक नहीं, राजनीतिक और सामाजिक कानून था, ताकि मूर्तिपूजक और मसीही एक साथ रहें।

4. कलीसिया परिषद और सब्त का परिवर्तन

चौथी शताब्दी में चर्च परिषदों (जैसे Laodicea Council) ने कहा:

“मसीही यहूदियों की तरह सब्त न मानें, बल्कि रविवार को मानें।”

👉 यह निर्णय बाइबल से नहीं, बल्कि कलीसिया की परंपरा से आया।

5. क्या बाइबल में सब्त बदलने की आज्ञा है?

❌ नहीं।

बाइबल में कहीं नहीं लिखा:

“सब्त अब समाप्त हो गया”

“रविवार नया विश्राम दिन है”

बल्कि लिखा है:

“मैं यहोवा हूँ, मैं बदलता नहीं।”

(मलाकी 3:6)

6. निष्कर्ष (Conclusion)

सब्त (शनिवार) परमेश्वर द्वारा ठहराया गया दिन है

रविवार रोमन संस्कृति और कॉन्स्टेंटाइन के आदेश से प्रचलित हुआ

रविवार की आराधना मानवीय परंपरा है, बाइबल की आज्ञा नहीं

👉 सच्ची आराधना परंपरा से नहीं, परमेश्वर के वचन से होनी चाहिए।

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